Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 18, Verse 22
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 18, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
बहिः कृत्रिमसंरम्भो हृदि संरम्भवर्जितः ।
कर्ता बहिरकर्तान्तर्लोके विहर राघव ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, बाहर कृत्रिम आडम्बरवाले ओर हृदय में आडम्बरहीन, बाहर कर्ता ओर भीतर
अकर्ता आप लोक में विहार कीजिये