Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 18, Verse 36
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 18, verse 36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 36
संस्कृत श्लोक
अजातस्य सतो बन्धोर्बन्धुदुःखसुखभ्रमैः ।
कस्ते राघव संबन्धो यदेताननुशोचसि ॥ ३६ ॥
हिन्दी अर्थ
मिथ्या होने के कारण बन्धु के उत्पन्न होने पर उसके
दुःख-सुख के भ्रमो से आपका कौन सम्बन्ध है जो आप इनके लिए शोक करते हैं