Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 18, Verse 39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 18, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
पूर्वमन्यस्तथेदानीं बभूविथ भविष्यसि ।
यदि राम तथापि त्वं सद्रूपं किं विमुह्यसि ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
हे
श्रीरामचन्द्रजी, पहले आप अन्य हुए थे, इस समय अन्य हैं और आगे भी अन्य होगे इस प्रकार क्षणिक
आत्मा को यदि आप जानते हैं, फिर भी आप सद्रूप का अवलम्बन करके क्यो शोक करते हे, दूसरे क्षण
मेँ शोच्य ओर शोचिता का अभाव होने से शोक का अवसर ही नहीं है, यह दूसरा पक्ष हे