Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 18, Verse 50
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 18, verse 50 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 50
संस्कृत श्लोक
आलूनशीर्णमखिलमिदमन्योन्यसंश्रितम् ।
अनारतं याति जगत्तरङ्गौघ इवाम्भसः ॥ ५० ॥
हिन्दी अर्थ
परस्पर निमित्तभूत ओर जर्जरित यह सारा
जगत जल के तरगों के समूह के समान सदा बहता है