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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 18, Verse 51

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 18, verse 51 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 51

संस्कृत श्लोक

अध ऊर्ध्वत्वमायाति यात्यूर्ध्वत्वमधस्तथा । संसारस्य चलस्यास्य चक्रनेमिरिवाभितः ॥ ५१ ॥

हिन्दी अर्थ

इस चंचल संसार का चक्र नेमि के (पहिये के घेरे के) समान चारों ओर से नीचे का भाग ऊपर आता है ओर ऊपर का भाग नीचे आता हे