Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 18, Verse 62
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 18, verse 62 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 62
संस्कृत श्लोक
न तदस्ति न यत्राहं न तदस्ति न यन्मम ।
इति निर्णीय धीराणां विगतावरणैव धीः ॥ ६२ ॥
हिन्दी अर्थ
वह वस्तु नहीं है, जहाँ पर मैं नहीं हू । वह वस्तु नहीं हे, जो मेरी न हो, ऐसा
निश्चय कर धीर पुरुषों की बुद्धि पूर्वोक्त आवरण से रहित ही होती है