Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 18, Verse 64
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 18, verse 64 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 64
संस्कृत श्लोक
सर्वा एव हि ते भूतजातयो राम बन्धवः ।
अत्यन्तासंयुता एतास्तव राम न काश्चन ॥ ६४ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, सभी
भूतजातियाँ आपके बन्धु सम्बन्धी हैं, क्योंकि अनादि संसार में सब योनियं मे बहुत बार आपने जन्म
लिया हे । ये सब आपकी बन्धुता के अत्यन्त असंबद्ध नहीं हे, क्योकि बारी-बारी से सब-के-साथ
आपका सम्बन्ध है अथवा देहद्वारक परम्परा सम्बन्ध की अपेक्षा सब जीवों के साथ एकात्म्य सम्बन्ध
अन्तरंग है, अतएव उस सम्बन्ध से अत्यन्त असम्बद्ध कोई नहीं है, यह भाव समझना चाहिये