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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 18, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 18, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

पृष्टः सन्प्रकृतं वक्ति न पृष्टः स्थाणुवत्स्थितः । ईहितानीहितैर्मुक्तः संसारे नावसीदति ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

जो पूछने पर प्रस्तुत विषय को कहता हैं, बिना पूछे मौन होकर खम्भ की तरह खड़ा रहता है, इच्छा ओर अनिच्छा से रहित वह पुरुष संसार में दुःखी नहीं होता