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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 18, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 18, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

सर्वस्याभिमतं वक्ता चोदितः पेशलोक्तिमान् । आशयज्ञश्च भूतानां संसारे नावसीदति ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

सबका प्रिय करनेवाला, अगर कोई आक्षेप करे तो चतुरतापूर्वक समाधान करनेवाला ओर प्राणियों के आशय को जाननेवाला पुरुष संसार में पीडित नहीं होता