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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 19, Verses 1–2

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 19, verses 1–2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 19 · श्लोक 1,2

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । अत्रैवोदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम् । भ्रात्रोस्त्रिपथगातीरे संवादं मुनिपुत्रयोः ॥ १ ॥ अयं बन्धुरयं नेति कथाप्रस्तावतः स्मृतम् । इतिहासमिमं पुण्यमाश्चर्यं श्रृणु राघव ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे श्रीरामचन्द्रजी, पूर्वोक्त विषय में ही मुनिपुत्र दो भाइयों के गंगाजी के तट पर हुए संवादरूप इस प्राचीन इतिहास को विद्वान लोग कहते हैं| हे श्रीरामचन्द्रजी, यह बन्धु है, यह बन्धु नहीं हे, इस कथा के सिलसिले में मुझे इसका स्मरण हो आया है । आप इस पवित्र ओर अद्भुत इतिहास को सुनिये

सर्ग सन्दर्भ

अद्रारहर्वौँ सर्ग समाप्त उन्नीसर्वों सर्ग पूर्वोक्त कथन की सिद्धि के लिए पुण्य ओर पावन के आख्यान का वर्णन, जिसमें पुण्य ने पितृशोकार्त पावन को ज्ञानोपदेश दिया |