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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 2, Verse 21

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 2, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 2 · श्लोक 21

संस्कृत श्लोक

भोगास्त्यक्तुं न शक्यन्ते तत्त्यागेन विना वयम् । प्रभवामो न विपदामहो संकटमागतम् ॥ २१ ॥

हिन्दी अर्थ

यदि कोई शंका करे, विचार से क्या प्रयोजन है, भोगो का ही त्याग कीजिये तो इस पर कहते हैं। भोगों का त्याग नहीं किया जा सकता और उनके त्याग के बिना हम विपत्तियों से निस्तार नहीं पा सकते, अहो यह बड़ा संकट आया । भाव यह है कि सर्वथा भोगो का त्याग करने से जीवन ही नहीं रह सकता । जीवन के लिए थोड़ा भी यदि भोग का उपादान किया जाय, तो वासनावृद्धि का संकट आ गया