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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 2, Verse 23

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 2, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 2 · श्लोक 23

संस्कृत श्लोक

परमां शान्तिमागत्य गतसंसारसंभ्रमा । बालेव लब्धदयिता कंचित्प्राप्स्यति नो मतिः ॥ २३ ॥

हिन्दी अर्थ

यदि सब विषयों की निवृत्ति होने पर भी एकमात्र ब्रह्माकारता का अवलम्बन करके वासनारहित मन को स्थापित किया जा सके, तो इच्छित सिद्धि हो सकती है, ऐसा विचार करते हुए कहते हैं। जिस युवती ने अपने पति को पा लिया, वह फिर दूसरे का स्मरण नहीं करती है वैसे ही संसारभ्रम से रहित ब्रह्माकारता को प्राप्त हुई हमारी मति परम शान्ति को प्राप्त करके दूसरे किसी का स्मरण नहीं करेगी