Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 2, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 2, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 2 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
संध्यां ववन्दिरे सुष्टु जेपुश्चैवाघमर्षणम् ।
पेठुः स्तोत्राणि पुण्यानि जगुर्गाथा मनोहराः ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर उन्होने भलीर्भाति सन्ध्यावन्दन
किया, अघमर्षण मन्त्रों का जप किया, पवित्र स्तोत्र पढे ओर मनोहर गाथाएँ गाई