Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 24, Verses 1–2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 24, verses 1–2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 24 · श्लोक 1,2
संस्कृत श्लोक
बलिरुवाच ।
केनोपायेन बलवान्स तात परिजीयते ।
कोऽसावतिमहावीर्यः सर्वं प्रकथयाशु मे ॥ १ ॥
विरोचन उवाच ।
मन्त्रिणस्तस्य तनय नित्याजेयस्थितेरपि ।
श्रृणु वच्मि सुसाधत्वं येनासौ परिजीयते ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
बलि ने कहा : हे तात, उस बलवान मन्त्री पर किस उपाय से विजय प्राप्त की जा सकती हे तथा
महाबलशाली वह कौन है ? कृपा करके यह सब शीघ्र मुझसे कहिये ।
विरोचन ने कहा : हे पुत्र, यद्यपि वह मन्त्री नित्य अजेय स्थितिवाला है, तथापि उसको सुख से
जीतने का उपाय मैं तुमसे कहता हूँ, जिससे उस पर विजय प्राप्त की जा सकती हे, उसे तुम सुनो
सर्ग सन्दर्भ
तेईसर्वौँ सर्ग समाप्त चौबीसवाँ सर्म राजा के दर्शन में उपायभूत वैराग्य आदि के साथ उस दुष्ट मन्त्री पर विजय प्राप्ति के उपाय का वर्णन ।