Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 24, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 24, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 24 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
एषा ह्यत्यन्तदुष्प्रापा सुप्रापा च महामते ।
अनभ्यस्तातिदुष्प्रापा स्वभ्यस्ता प्राप्यते सुखम् ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
विरोचन ने कहा : हे पुत्र, सभी विषयों के प्रति जो यह अत्यन्त अस्पृहा है, वही मन की विजय के
लिए युक्ति । यही परम युक्ति है, इसी के द्वारा महामदमत्त अपने मनरूपी मत्त हस्ती का शीघ्र दमन
किया जाता है ॥१७.१८॥ हे महामते, यह युक्ति अत्यन्त दुष्प्राप्प है और सहज में प्राप्त होनेवाली भी
है । अगर इस का अभ्यास न किया जाय, तो अत्यन्त दुष्प्राप्य है । भलीर्भोति यदि अभ्यास किया जाय,
तो अनायास प्राप्त होती है