Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 24, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 24, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 24 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
क्रमादभ्यस्यमानैषा विषयारतिरात्मज ।
सर्वतः स्फुटतामेति सेकसिक्ता लता यथा ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
हे पुत्र, इन विषयों मे विरक्ति का यदि क्रम से अभ्यास किया जाय,
तो यह जैसे सेक से सींची गई लता चारों ओर से स्फुटता को प्राप्त होती हे वैसे ही शान्ति आदि रूप
शाखा-प्रशाखाओं के विस्तार से व्यक्तता को प्राप्त होती है