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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 24, Verse 36

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 24, verse 36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 24 · श्लोक 36

संस्कृत श्लोक

संकल्पयति लोकेऽस्मिंस्तत्तथा तस्य नान्यथा । पुरुषार्थादृते पुत्र न किंचिदिह विद्यते ॥ ३६ ॥

हिन्दी अर्थ

पुरुष कर्म और ज्ञान के अधिकारी शरीर को प्राप्त होकर पौरुष से जिस पदार्थ का जैसे संकल्प करता है, वह वैसे होता है, उससे विपरीत नहीं होता