Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 24, Verse 35
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 24, verse 35 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 24 · श्लोक 35
संस्कृत श्लोक
मनस्यस्तंगते साधो यद्भवत्यस्तु तत्तथा ।
जीवो हि पुरुषो जातः पौरुषेण स यद्यथा ॥ ३५ ॥
हिन्दी अर्थ
इसलिए जब तक मन हे, तब तक न दैव है न नियति है । मन के अस्त होने पर जो होता है, वह
वैसे ही रहे