Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 24, Verse 43
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 24, verse 43 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 24 · श्लोक 43
संस्कृत श्लोक
आत्मावलोकनेनैषा विषयारतिरुत्तमा ।
हृदये स्थितिमायाति श्रीरिवाम्भोजकोटरे ॥ ४३ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे लक्ष्मी कमल के अंदर निवास करती है, वैसे ही यह विषयों में उत्तम अरति आत्म-
साक्षात्कार के हृदय में निवास करती है