Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 24, Verse 44
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 24, verse 44 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 24 · श्लोक 44
संस्कृत श्लोक
तस्मात्प्रज्ञानिकाषेण विचारेणातिचारुणा ।
देवमालोकयेद्भोगाद्रतिं चावहरेत्समम् ॥ ४४ ॥
हिन्दी अर्थ
इसलिए पुरुष प्रज्ञारूप मणि की कसौटी, अति उत्तम
विचार से परब्रह्म परमात्मा का दर्शन करे और साथ ही साथ भोगों के प्रति अनुराग को हटावे