Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 26, Verses 13–14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 26, verses 13–14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 26 · श्लोक 13,14
संस्कृत श्लोक
चिच्चेत्यकलनाबन्धस्तन्मुक्तिर्मुक्तिरुच्यते ।
चिदचेत्याखिलात्मेति सर्वसिद्धान्तसंग्रहः ॥ १३ ॥
एनं निश्चयमादाय विलोकयसि हेलया ।
स्वयमेवात्मनात्मानमनन्तं पदमाप्स्यसि ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
चित् की जो चेत्याकार कल्पना है, वही बन्ध है, उससे मुक्ति मोक्ष
कहलाता है। चेत्याकाररहित चित् पूर्ण आत्मा है, यह सब सिद्धान्तं का संग्रह है। ऐसा निश्चय कर यदि
तुम स्वयं अखण्डाकारवृत्ति से आत्मा का अनायास दर्शन कर सकोगे, तो तुम अनन्त पद को प्राप्त
होओगे