Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 26, Verses 8–9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 26, verses 8–9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 26 · श्लोक 8,9

संस्कृत श्लोक

भोगान्प्रति विरक्तोऽस्मि महासंमोहदायिनः । तत्तत्त्वं ज्ञातुमिच्छामि महासंमोहहारि यत् ॥ ८ ॥ कियन्मात्रमिदं भोगजालं किमयमेव वा । कोऽहं कस्त्वं किमेते वा लोका इति वदाशु मे ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

भगवन्‌, महामोह देनेवाले भोगों के प्रति मेँ विरक्त हूँ, जो अपने ज्ञानमात्र से महामोह का नाश करे, ऐसे तत्त्व को जानना चाहता हू । इस भोगजाल के उत्कर्षं की अवधि कितनी बडी है, इसकी प्रकृति क्या हे, मैं क्या हूँ और ये भोग्य लोक क्या हैं ? यह सब आप मुझसे शीघ्र कहने की कृपा कीजिये