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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 27, Verse 26

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 27, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 27 · श्लोक 26

संस्कृत श्लोक

नासादयन्ति मामेताः सुखदुःखदशा दृशः । संवेदनमसंवेद्यमचेत्यं चेतनं ततम् ॥ २६ ॥

हिन्दी अर्थ

वर्तमान में असंवेद्य (चक्षु आदिवृत्तियों की व्यावृत्ति के लिए असंवेद्य कहा है) संवेदनरूप और अचेत्य (अतीत और अनागत के विषय में स्मृति आदि वृत्तियों की व्यावृत्ति के लिए अचेत्य कहा है) चेतनरूप सर्वव्याप्त मुझको ये जगत के भाव और अभाव देशतः, कालतः अथवा वस्तुतः परिच्छिन्न नहीं कर सकते हैं, बल्कि ये भाव और अभाव ही साक्षी से परिच्छेद्य हैं, यह भाव है