Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 28, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 28, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 28 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
अतिमात्रमिदं दैत्याः स्वविचारणयैव यत् ।
संप्राप्तविमलावासः सिद्धोऽयं भगवान्बलिः ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
हे दैत्य लोगों, सिद्ध हुआ यह रेश्वर्यशाली बलि अपने विचार से ही विमल पद को प्राप्त हुआ
है । यह विश्रान्तिसुख का अतिशय है