Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 28, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 28, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 28 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
स्व एवालोक एतेन संप्राप्तोऽज्ञानसंकटे ।
शान्तेऽत्र संभ्रमे सौरो दिनेनेव करोत्करः ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे पृथिवी
पर रात्रि के अन्धकार, निद्रा आदि के शान्त होने पर दिन को सूर्य का किरणसमूह प्राप्त होता है,
वैसे ही अज्ञानरूपी संकट के दूर होने पर अपना ही प्रकाश इसको प्राप्त हुआ हे