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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 28, Verse 22

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 28, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 28 · श्लोक 22

संस्कृत श्लोक

नरा मही महिपतयो रसातलं ग्रहा नभस्त्रिदशगणास्त्रिविष्टपम् । दिशोऽद्रयो दिक्पतयश्च कंदरान्वनेचरा गगनचराश्च खं ययुः ॥ २२ ॥

हिन्दी अर्थ

उस समय बाहर से आये हुए मनुष्य नागादि ने क्या किया ? ऐसा प्रश्न होने पर कहते हैं। मनुष्य पृथिवी को गये, नागराज आदि रसातल को गये, ग्रह अन्तरिक्ष को गये, देववृन्द स्वर्ग को, कुलाचल आदि पर्वतो में अधिकृत देवता ओर दिक्पाल अपनी-अपनी दिशाओं को, ऋक्ष, वानर आदि यूथपति किष्किन्धा आदि कन्दराओं को व गरुड, संपाति, जटायु आदि आकाशचारी आकाश को गये