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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 29, Verses 40–41

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 29, verses 40–41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 29 · श्लोक 40,41

संस्कृत श्लोक

बलिवत्प्रविवेकेन नित्योऽहमिति निश्चयात् । पदमासादयाद्वैतं पौरुषेणैव राघव ॥ ४० ॥ द्वे चाष्टौ चैव वर्षाणां कोटीर्भुक्त्वा जगत्त्रयम् । अन्ते वैरस्यमापन्नो बलिरप्यसरोत्तमः ॥ ४१ ॥

हिन्दी अर्थ

हे रघुवर, आप बलि के सदुश अपने विचार से “मे नित्य हूँ” इस प्रकार के निश्चय से पौरूषपूर्वक अद्वैत पद को प्राप्त कीजिये। दस करोड़ वर्ष तक लगातार तीनों लोकों पर शासन कर अन्त में असुरश्रेष्ठ बलि भी वैराग्य को प्राप्त हुआ