Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 29, Verse 42
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 29, verse 42 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 29 · श्लोक 42
संस्कृत श्लोक
तस्मादवश्यवैरस्यं भोगभारमरिंदम ।
संत्यज्य सत्यमानन्दमवैरस्यं पदं व्रज ॥ ४२ ॥
हिन्दी अर्थ
हे शत्रुतापन, इसलिए अन्त में अवश्य दुःखदायी सभी भोगों का त्यागकर आप सत्य आनन्दरूप
दुःखरहित परम पद को प्राप्त होओ