Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 29, Verse 48
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 29, verse 48 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 29 · श्लोक 48
संस्कृत श्लोक
न जायसे न म्रियसे त्वमजः पुरुषो विराट् ।
चिच्छुद्धा जन्ममरणभ्रान्तयो मा भवन्तु ते ॥ ४८ ॥
हिन्दी अर्थ
कालकृत वैषम्य भी आप में नहीं है, यह कहते हैं।
अज, पुरुषविराट्रूप आप शुद्ध चैतन्य ही हैं। न तो आप उत्पन्न होते हैं और न मरते हैं। आपको
जन्ममरण भ्रान्तियाँ न हों