Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 29, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 29, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 29 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
तदेतामेव पदवीमवलम्ब्य करोम्यहम् ।
भवतीहोपभुक्ताभिः किं मे बाह्यविभूतिभिः ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
इसलिए इसी पदवी का अवलम्बन करके मैं विश्रान्ति
सुख को प्राप्त करूँ। बाह्य विभूतियों के उपभोग से मेरा क्या होगा ? यानी उनसे इस प्रकार का कुछ भी
विश्रान्तिसुख मुझे नहीं मिलेगा