Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 29, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 29, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 29 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
ऐन्दवेष्वपि विश्वेषु न तथानन्दवीचयः ।
तोषयन्ति यथान्तर्मे संसिद्धिभवभूतयः ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
समाधि के परिपाक से उत्पन्न आनन्दराशि मेरे अन्तःकरण को
जैसे सन्तुष्ट कर रही है, चन्द्रमा के बिम्बों में आनन्द लहरियाँ भी वैसा सन्तुष्ट नहीं कर सकती