Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 29, Verse 53
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 29, verse 53 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 29 · श्लोक 53
संस्कृत श्लोक
इष्टानिष्टदृशोस्त्यागे समतोदेति शाश्वती ।
तया हृदयवर्तिन्या पुनर्जन्तुर्न जायते ॥ ५३ ॥
हिन्दी अर्थ
इष्ट और अनिष्टदुष्टि का त्याग करने पर अक्षय समता उत्पन्न होती हे । अभ्यास से
हृदय में स्थिर हुई समता से फिर प्राणी उत्पन्न नहीं होता