Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 29, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 29, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 29 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
चितः क्षीणविकल्पस्य किमुपादेयमस्ति मे ।
मनस्तदभिपातित्वाद्याति तद्रसतामलम् ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
से ही बाह्य पदार्थो को देखने पर मन उनकी ओर आकृष्ट होने के कारण रागितारूप मल को प्राप्त होता
है, केवल दर्शनमात्र से नहीं