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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 3, Verse 11

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 3, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 3 · श्लोक 11

संस्कृत श्लोक

ययौ गृहं दाशरथं सैन्येन महता वृतः । ब्रह्मेव शक्रनगरं समस्तसुरमालितः ॥ ११ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे सब देवताओं से परिवृत ब्रह्मा इन्द्र के नगर में जाते है वैसे ही विशाल वाहिनी परिवृत श्रीवसिष्ठजी महाराज दशरथ के घर गये