Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 3, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 3, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 3 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
समाधिसंस्थमेकान्ते मुनिमात्मपरायणम् ।
दूर एवाननामासौ रामो विनतकन्धरः ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
पहले ही स्नान, सन्ध्या आदि से निवृत्त होकर एकान्त में समाधि में बैठे हुए
आत्मपरायण मुनि को श्रीरामचन्द्रजी ने सिर झुकाकर दूर से ही प्रणाम किया