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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 3, Verse 4

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 3, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 3 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

प्रातःस्नानविधिं कृत्वा संपाद्य भ्रातृभिः पुनः । प्रहिताल्पपरीवारो वसिष्ठसदनं ययौ ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

प्रातः काल की स्नान विधि कर ओर सन्ध्या-वन्दन आदि कर्म से निवृत्त होकर भाईयों के साथ थोडे से अपने परिजनों को भेजकर फिर स्वयं वसिष्ठजी के निवास स्थान पर गये