Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 3, Verses 2–3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 3, verses 2–3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 3 · श्लोक 2,3
संस्कृत श्लोक
किंचित्तमःकडारासु किंचिदप्यरुणासु च ।
नभोविरलतारासु दिक्षु संमार्जितास्विव ॥ २ ॥
प्रभाततूर्यघोषेण सममिन्दुसमाननः ।
उत्तस्थौ राघवः श्रीमान्पद्मः पद्मकरादिव ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
कुछ अन्धकारवश पीले, कुछ लाल आकाश में विरल तारोंवाली दिशाओं को मानों बुहारी से
छोड़ने पर प्रातःकाल के तुर्यशब्द के साथ चन्द्रमा के समान सुन्दर मुखवाले श्रीरामचन्द्रजी कमल के
तालाब से सुन्दर कमल के समान उठे