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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 30, Verse 2

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 30, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 30 · श्लोक 2

संस्कृत श्लोक

आसीत्पातालकुहरे विद्रावितसुरासुरः । हिरण्यकशिपुर्नाम नारायणपराक्रमः ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ

नारायण के समान पाताल में पराक्रमी हिरण्यकशिपु नाम का दैत्य था । उसने अपने पराक्रम से देवता ओर असुरो को पराजित कर दिया था