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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 31, Verse 14

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 31, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 31 · श्लोक 14

संस्कृत श्लोक

दिव्याम्बरलतापत्रा रत्नस्तबकदन्तुराः । पुनरारोपितास्तत्र नन्दने कल्पपादपाः ॥ १४ ॥

हिन्दी अर्थ

देवताओं ने उस नन्दनवन मं दिव्यवस्त्रों से युक्त लता ओर पत्तेवाले रत्नों के गुच्छों से लदे हुए कल्पवृक्ष फिर से लगा लिये हैं