Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 31, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 31, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 31 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
पुरा त्वमरबन्दीनामसुरेः संस्तुतं मुखम् ।
अद्य त्वसुरबन्दीनां सुरैरालोकितं मुखम् ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
पहले असुरों
ने देवताओं की बन्दी नारियों केसुन्दर मुख प्रशंसा के साथ देखे थे, लेकिन अब असुरों की बन्दी नारियों
के मुख देवताओं द्वारा देखे जाते हैं