Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 31, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 31, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 31 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
अस्माकमिभगण्डेषु दानदाहविभूतयः ।
लसन्ति मरुखण्डेषु संशुष्केष्विव धूलयः ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
मद के दाह से उत्पन्न हुई राख
हमारे हाथियों के सूखे हुए गण्डस्थलं में सूखे हुए मरुस्थलों की धूलि के समान प्रतीत होती है