Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 31, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 31, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 31 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
विकासिसितमन्दारमकरन्दारुणानिलाः ।
ते मेरुशिखरैस्तुल्या दैत्या दुर्लभतां गताः ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
फूले हुए सफेद मन्दार के परागयुक्त मकरन्दो से रंगे हुए वायु जिनका अंगस्पर्श करते थे, अतएव जो
मारे हर्ष के मेरुशिखरों के तुल्य थे, वे दैत्य दुर्लभ हो गये हैं