Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 31, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 31, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 31 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
सुरगन्धर्वसुन्दर्यो दानवान्तःपुरोचिताः ।
अद्य मेरौ स्थितिं याता मञ्जर्य इव पादपे ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
पहले दानवों के अन्तःपुर में अभ्यस्त
(चिरकाल तक निवास कर चुकी) देवता ओर गन्धर्वो की सुन्दरियाँ आज वृक्ष पर मंजरियों के समान
मेरू पर निवास करती हैं