Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 31, Verse 54
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 31, verse 54 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 31 · श्लोक 54
संस्कृत श्लोक
अयं मे भास्कराकार उद्यदंशुः सुदर्शनः ।
ज्वालाजटिलपर्यन्तपरिपाटलदिक्तटः ॥ ५४ ॥
हिन्दी अर्थ
यह सूर्य के समान
चमकीला मेरा सुदर्शन चक्र है, जिससे सदा किरणें बाहर फूट रही हैं और जो चारों ओर ज्वालारूपी
जटाओं से व्याप्त है । इसने चारों ओर दिकृतटों को पटल के समान लाल कर दिया हे