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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 33, Verse 12

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 33, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 33 · श्लोक 12

संस्कृत श्लोक

न रेमे लोकचर्यासु शास्त्रार्थकथनादृते । न जायते रतिस्तस्य दृश्ये स्थल इवाजिनी ॥ १२ ॥

हिन्दी अर्थ

स्थल में जैसे कमलिनी का प्रेम नहीं होता वैसे ही दर्शन योग्य समाज, उत्सव आदि कौतुको में उसका प्रेम न था