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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 33, Verse 18

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 33, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 33 · श्लोक 18

संस्कृत श्लोक

पूजागृहगतं देवं प्रत्यक्षावस्थितं हरिम् । प्रह्लादः परमप्रीतो गिरा तुष्टाव पुष्टया ॥ १८ ॥

हिन्दी अर्थ

परम प्रसन्न हुए प्रह्ाद ने पूजागृह में आये हुए नेत्रो के सामने स्थित भगवान्‌ श्रीहरि की मारे हर्ष के विकास को प्राप्त हुई वाणी से स्तुति की