Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 33, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 33, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 33 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
कुवलयदलनीलसंनिकाशं शरदमलाम्बरकोटरोपमानम् ।
भ्रमरतिमिरकज्जलाञ्जनाभं सरसिजचक्रगदाधरं प्रपद्ये ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
नीलकमल ओर नीलमणि के समान कान्तिवाले, ओर
शरत्कालीन निर्मल आकाश के मध्यभाग के तुल्य श्यामल, भ्रमर, अन्धकार, काजल ओर अंजन के
समान कान्तिवाले, कमल, चक्र ओर गदा धारण करनेवाले आपकी शरण में मे प्राप्त होता हू