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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 33, Verse 4

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 33, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 33 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

गुणवान्निर्गुणो जात इत्यनर्थक्रमं विदुः । निर्गुणो गुणवाञ्जात इत्याहुः सिद्धिदं क्रमम् ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

देवताओं ने जो उसकी भगवद्भक्ति को अनुचित दोषरूप ठहराया था, उसका परिहार करते हैं। यदि गुणवान पुरुष गुणहीन हो जाय, तो इसे विद्वान लोग पुरुषार्थ का विघात करनेवाला क्रम कहते हैं। यदि निर्गुण गुणवान हो जाय, तो इसे सिद्धिदायक क्रम कहते हैं