Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 33, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 33, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 33 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
इत्युक्त्वा विबुधांस्तत्र क्षीरोदार्णववीचिषु ।
अन्तर्धानं ययौ देवस्तटतापिच्छगुच्छवत् ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे श्रीरामचन्द्रजी, भगवान देवताओं से यह कह कर वहाँ क्षीरसागर की
लहरों में तटवर्ती तापिच्छ वृक्ष के गुच्छों की तरह अन्तर्हित हो गये