Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 34, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 34, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 34 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
जडया कर्णशष्कुल्या कल्प्यमानः क्षणक्षयी ।
शून्याकृतिः शून्यभवः शब्दो नाहमचेतनः ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
इस प्रकार शब्द आदि विषय भी मैं नहीं हूँ, ऐसा कहते हैं।
जड़ (अचिद्रूप) कर्णच्छिद्र द्वारा अति दीर्घ, गम्भीर, पद वाक्य आदि भेदों से कल्पित क्षणभर में
नष्ट होनेवाला, क्षयी होने के कारण ही शून्याकार, आकाश से उत्पन्न होनेवाला अचेतन शब्द भी मैं
नहीं हू